Rahul Maurya

After the laptop shuts

2023-03-01

I write poetry, I'm currently learning to play the ukulele, and I love going on treks and hitting the gym regularly.

Rahul Maurya playing the ukulele at home

Two poems

इफ्तार भी तुम

मेरी कहानी की रचियता हो, और उसका एक किरदार भी तुम, मेरी सुबहों की तुम सहरी हो, और शामों की इफ्तार भी तुम ॥

टूटती कड़ियां और छूटते हाथ

टूटती कड़ियों और छूटते हाथों के बीच, निहार रहा हूं वक्त का तांडव,

बेबसी जैसे बह रही है हवाओं में, सांसे जैसे अटकी हैं दवाओं में,

लकड़ियों की सेज़ पर, जल रहे हैं अपने, उफनती हुई लपटों में, ख़ाक हो रहे सपने,

आज शब्द भी कम हैं और कलम भी नम है, लाचारी का मंज़र है और हर तरफ ग़म है

I wrote this at the peak of Covid's second wave, when there was a horrific outbreak and our health system almost collapsed.

Treks

  • Kuari Pass Trek, 2026
  • Kedarkantha Trek, 2025
  • Kheerganga Trek, 2017